भूगर्भ जल विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार

भूजल नीति





उत्तर प्रदेश में भूजल प्रबन्धन, वर्षा जल संचयन एवं भूजल रिचार्ज हेतु ‘‘समग्र नीति‘‘
  • उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ भूगर्भ जल सम्पदा ने प्रमुख सिंचाई साधन के रूप में एक विशिष्ट स्थान बना लिया है।
  • प्रदेश में लगभग 70 प्रतिशत सिंचित कृषि मुख्य रूप से भूगर्भ जल संसाधनों पर निर्भर है। वहीं, पेयजल एवं औद्योगिक सेक्टर की अधिकांश जल आवश्यकताओं की पूर्ति भी भूगर्भ जल से ही होती है।
  • भूगर्भ जल के असीमित एवं अत्याधिक उपयोग के परिणामस्वरूप, प्रदेश के अनेक ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अतिदोहन की स्थिति उत्पन्न हो गयी है।
  • भूगर्भ जल का विकास/दोहन राज्य की आवश्यकता है, अतः अतिदोहित/गुणवत्ता प्रभावित जैसे-संकटग्रस्त क्षेत्रों हेतु दीर्घकालिक प्रबन्घन एवं नियोजन की अत्यन्त आवश्यकता है।
  • राज्य सरकार इस संसाधन के सस्टेनेबल प्रबन्धन के साथ-साथ इसे संरक्षित करने के लिए गम्भीर है और इसी कड़ी में वर्षा जल संचयन, भूगर्भ जल रिचार्ज व एक्यूफर प्रबन्धन जैसे कार्यक्रमों को शासन की प्राथमिकताओं में रखा गया है।
  • प्रदेश में भूजल संसाधनों के समेकित प्रबन्धन तथा विभिन्न योजनाओं में भूगर्भ जल पर निरंतर बढ़ती निर्भरता के दृष्टिगत वर्षा जल संचयन एवं रिचार्ज कार्यक्रमों को एकीकृत ढंग से लागू करने के उद्देश्य से प्रदेश में ’समग्र भूजल प्रबंधन नीति’ की आवश्यकता है।
  • राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में भूगर्भ जल प्रबन्धन, वर्षा जल संचयन एवं भूगर्भ जल रिचार्ज हेतु समग्र नीति शासनादेश दिनांक 18 फरवरी, 2013 द्वारा निर्गत की गयी है।
उद्देश्य
  • भूगर्भ जल संसाधनों का विनियमित दोहन तथा अनुकूलतम एवं विवेकयुक्त उपयोग किया जाना।
  • समग्र भूजल प्रबन्धन हेतु एक्यूफर मैपिंग एवं एक्यूफर आधारित प्रबन्धन के राष्ट्रीय कार्यक्रम को प्रदेश में प्राथमिकता पर योजनाबद्ध तरीके से आरम्भ किया जाना।
  • भूजल सम्वर्धन कार्यक्रम को वृहद् स्तर पर एकीकृत रूप से लागू करना तथा अतिदोहित / क्रिटिकल विकासखण्डों को समयबद्ध रूप से सुरक्षित श्रेणी में लाना।
  • सतही जल एवं भूजल के सहयुक्त उपयोग को प्रभावी ढंग से लागू करना।
  • संकटग्रस्त भूजल क्षेत्रों में जल उपयोग की कुशल विधाओं को प्रोत्साहित करना।
  • भूजल प्रबन्धन, नियोजन एवं संरक्षण में रिवर बेसिन/वाटरशेड अप्रोच को प्राथमिकता देना।
  • प्रदूषित भूजल स्रोतों को चिन्हित कर प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित जलापूर्ति सुनिश्चित कराना।
  • विभिन्न सम्बंधित विभागों द्वारा भूजल संरक्षण एवं संर्वधन के कार्यक्रमों को सहभागी प्रबन्धन के आधार पर समन्वित एवं एकीकृत ढंग से लागू करना।
  • शोध एवं प्रशिक्षण के साथ जन जागरूकता को बढ़ावा देना।